Wednesday, 17 August 2016

Friday, 12 August 2016

 Based On True Event

"एक्ट अपोन अ ड्रीम"


ट्रिंग ट्रिंग
ट्रिंग ट्रिंग
आँखे मलते हुए फोन उठाया कौन है यार
हाँ भाई उठ गए याद है न आज हमलोगों के बरेली जाना है
आज एग्जाम हैं
हाँ आकश: बस उठ गए अभी २० मिनट में रेडी होती हैं
फोन काटने के बाद मै उठा और टॉयलेट जाने के बाद नहा धो कर निकल पड़े
स्टेशन पहुचे तो ट्रेन एक घंटे लेट तो हम लोगो ने बस से जाने का फैसला किया
और बस से निकल पड़े बरेली के लिए
मैंने बस में सबसे पीछे खिड़की वाली सीट का चुनाव किया
क्न्योकी मुझे कम ही प्रकृति के दीदार होते हैं
तो बस निकल पड़ी अपनी रास्ते खिड़की से जो बाहर के नज़ारे हो रहे थे
उसने मन को मोह लिया और मै खो गया अपनी
दुनिया में आज कल मै डेल कार्नेगी को पढ़ रहा था जिन्होंने इन दिनों
मुझपे गहेरा प्रभाव डाला हुआ था और मै यही सब सोचता हुआ
प्रकर्ति के दर्शन ले रहा था कब एक घंटा बीत गया पता ही नहीं चला
फिर अचानक रस्ते में बस किसी वजहें से रुक गयी खडकी के बाहर
देखा तो सामने रेलवे क्रासिंग था और ट्रेन बस गुजरने ही वाली थी
क्रासिंग पर कोई भी फाटक नहीं था रेलवे में काम करने वाले ग्रुप
डी के लड़के बल्ली लगा कर फाटक बंद कर रहे थे
इन सब बातो से मेरा पारा चढ़ता ही चला जा रहा था इस वजहे
से नहीं के इस देरी के ज़िम्मेदार ये लोग थे मेरा दिमाग तो बस में बैठे
उन यात्रिओं पे ख़राब हो रहा था जो इन करमचारियों का मज़ाक बना रहे थे
एक मैडम तो हस हस के लोट पोट हो जा रहीं थी मुझसे रहा नहीं गया
मै उठा और बस में सबसे आगे जाकर बोला सुनिए सुनिए आवश्यक सुचना
आप जो बाहर नज़ारा देख रहें हैं वो एक मजाक से कम नहीं है
हैं न ???????
इतने में एक अंकल बेटा बिलकुल सही कहे रहे हो देखो बाहर मैंने कहा जी अंकल जी
ये सब एक मजाक ही तो है देखो न वो लोग बाहर जो नाटक दिखा रहे हैं सच में वो पागल हैं
पता नहीं पगला गएँ हैं क्या वो लोग मेरा मतलब आप खुद ही सोचिये अगर वो ये मजाक नहीं करते तो
तो क्या पता बस ट्रैक पे ही रुक जाती इतने में ट्रेन आके बस को उड़ा देती फिर आप डायरेक्ट घर ही पहुच जाते फर्क बस इतना होता
की आप कफ़न में लिपटे हुए होते और आप के आस पास सब लोग मातम मन रहे होते रो रहे होते
अब आप बताइए ये मजाक गलत है सही
वो बिचारे लोग अपना काम कर रहें हैं हम लोगो के लिए अपना पसीना बहा रहे हैं
और आपको ये मज़ाक लग रहा है
मेरी नज़र में तो वो लोग हीरो हैं हीरो और हीरो सिर्फ पूरी दुनिया को बचा कर ही नहीं बना जा सकते हैं
अभी तक आपने फिल्मो में ही हीरो देखें होंगे आज असलियत में देख लीजिये अपना दिमाग साइड में रख कर
क्न्योकी ये हीरो गुंडों से नहीं लड़ रहे बस अपना काम कर रहें हैं
और अंकल जी के मुह से फिर एक शब्द भी नहीं निकला बस में सरे लोग गहेरे सन्नाटे में आ गए
और अचानक मेरे पीछे से किसी ने कुछ बहुत जोर से मारा 
और मै एक दम बस के फर्श पर जा गिरा
जब आँख खुली तो देखा बस चल चुकी थी ट्रेन भी पास कराइ जा चुकी थी
मै बस के फर्श से उठ कर सीट पे वापिस बैठ रहा था
और सब लोग मेरी तरफ देख रहे थे .....................................................????